संसद के बजट सत्र के दौरान लगातार हंगामे के बीच मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विपक्ष ने स्पीकर पर सदन की कार्यवाही में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है।
विपक्षी सांसदों ने लोकसभा महासचिव को नियम 94(सी) के तहत यह नोटिस दिया है, जिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। यह प्रस्ताव लोकसभा में कांग्रेस के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई द्वारा पेश किया गया है। नोटिस में संविधान के अनुच्छेद 94(सी) का हवाला देते हुए स्पीकर को पद से हटाने का प्रावधान अपनाया गया है।
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही खुले तौर पर पक्षपातपूर्ण तरीके से चला रहे हैं और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं को बार-बार बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा है।
विपक्ष ने अपने आरोपों के समर्थन में कई उदाहरण भी गिनाए हैं। नोटिस के अनुसार, 2 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी को अपना संबोधन पूरा नहीं करने दिया गया। वहीं, 3 फरवरी को आठ विपक्षी सांसदों को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए कथित तौर पर मनमाने ढंग से निलंबित कर दिया गया, जिसे लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग पर दंड बताया गया है।
पत्र में 4 फरवरी की एक घटना का भी उल्लेख किया गया है, जब विपक्षी सदस्यों की आपत्तियों के बावजूद एक भाजपा सांसद को कथित तौर पर बिना किसी रोक-टोक के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर आपत्तिजनक और व्यक्तिगत टिप्पणियां करने की अनुमति दी गई और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इसके अलावा, 5 फरवरी को धन्यवाद प्रस्ताव को वॉयस वोट से पारित कराए जाने के बाद स्पीकर ओम बिरला द्वारा दिए गए बयान पर भी विपक्ष ने आपत्ति जताई है। स्पीकर ने उस दौरान विपक्ष पर अभूतपूर्व हंगामा करने का आरोप लगाया था और कहा था कि उन्होंने संभावित अप्रिय स्थिति से बचने के लिए प्रधानमंत्री से सदन में न आने का अनुरोध किया था।
विपक्ष का कहना है कि इन टिप्पणियों में कांग्रेस सांसदों के खिलाफ स्पष्ट रूप से झूठे और अपमानजनक आरोप लगाए गए। नोटिस में यह भी कहा गया कि स्पीकर, जो संसदीय प्रक्रिया और मर्यादा के संरक्षक होते हैं, द्वारा सदन के पटल से ऐसे बयान देना इस संवैधानिक संस्था का दुरुपयोग है।
विपक्ष ने स्पष्ट किया कि वह व्यक्तिगत रूप से स्पीकर का सम्मान करता है, लेकिन उसे इस बात का गहरा दुख और आक्रोश है कि लोकसभा में विपक्षी सांसदों को जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे लगातार उठाने से रोका जा रहा है।